अपने
अपने कब पराये बन गए पता न चला,असल में ये पराये ही थे । जब हम बड़े हुए तो पता चला सच्चाई क्या है।पर दोष किसका है? हर कोई किस्सा सुनाये अपनी, किसको सुनाये हम अपनी। आगे की सोच के दिल घबराता है।कोई और नहीं मुझे तो 'मैं' डराता है। हर कोई तो हमदर्द है मेरा फिर अकेलापन मुझे क्यों खाता है। तन्हाई से डरने लगा है मन फिर भीड़ से भी कतराता है। belasnata